#ManoharParrikar गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का निधन

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एस. एस. एफ. क्राइम न्यूज, दिनांक 17 मार्च 2019 फरीदाबाद |हनीश|
गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का 63 वर्ष की आयु में रविवार को निधन हो गया. पर्रिकर पिछले एक साल से अग्नाशय के कैंसर से पीड़ित थे. उनका इलाज अमरीका के साथ-साथ नई दिल्ली स्थित एम्स और मुंबई के एक निजी अस्पताल में चल रहा था.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट कर पर्रिकर के निधन की जानकारी दी.

https://twitter.com/ANI/status/1107332246166474757?s=19
मनोहर पर्रिकर मोदी सरकार में भारत के रक्षा मंत्री रह चुके हैं. रक्षा मंत्री के कार्यकाल के दौरान ही उन्होंने इस्तीफ़ा दिया था और चौथी बार 14 मार्च 2017 को गोवा के मुख्यमंत्री बनाए गए थे.
इससे पहले वो 2000 से 2002, 2002 से 2005 और 2012 से 2014 में भी गोवा के मुख्यमंत्री रहे.
2014 से 2017 तक भारत के रक्षा मंत्री के कार्यकाल के दौरान वो उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के सांसद थे.
पर्रिकर का जन्म गोवा की राजधानी पणजी से क़रीब 13 किलोमीटर दूर मापुसा में 13 दिसंबर 1955 को हुआ था.
उन्होंने मडगांव के लोयला हाई स्कूल से पढ़ाई की और आईआईटी मुंबई से 1978 में मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की.
वो किसी भी भारतीय राज्य के विधायक बनने वाले पहले आईआईटी स्नातक थे.
मनोहर पर्रिकर के निधन से गोवा के सामाजिक राजनीतिक हालात में बहुत बड़ा असर होगा. वो आईआईटी से पास पहले इंजीनियर थे, जो किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री बने. साथ में गोवा में प्रशासनिक कार्यों पर उनकी छाप अमिट रहेगी.
वो भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी के ऐसे पहले राजनेता होंगे जिन्होंने ख़ुद को ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ के आइकन के रूप में आगे रखते हुए सभी समुदायों को शांति का संदेश दिया वो भी ऐसे माहौल में जब उनकी पार्टी देश के दूसरे हिस्सों में हिंदुत्व पर आक्रामक रूप अपनाए हुई थी.
उन्होंने राज्य में धर्मनिरपेक्षता, उदार प्रकृति और अपनी विचारधारा से अधिक इस क्षेत्र के लिए पुनर्निर्माण की राजनीति की, जो संभवत उनके लिए आवश्यक थी. अगर मनोहर पर्रिकर गोवा की बजाय उत्तर प्रदेश में राजनीति करते तो क्या वो वैसे ही उदारवादी राजनेता बन पाते? इस सवाल का जवाब हम नहीं जानते.
सत्ता हर किसी को बदलती है और पर्रिकर भी इससे अछूते नहीं रहे. जब उन्हें गोवा में राजनीतिक गलियारों में सेंध लगाने और अपनी पार्टी की मदद से सरकार गिराने का मौका मिला तो उन्होंने खुद को एक ऐसे महत्वाकांक्षी, लेकिन ईमानदार शख्स के रूप में पेश किया जो राज्य की राजनीति को भ्रष्टाचार और अस्थिरता से मुक्त करने के मिशन में लगा है.
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