#Howdy_Modi: अमेरिका में ऐतिहासिक कार्यक्रम के पीछे रहा हर्षवर्धन श्रिंगला का हाथ

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सेफ ओर सिक्योर फरीदाबाद क्राइम न्यूज, दिनांक 23 सितंबर 2019
अमेरिका (USA) के ह्यूस्टन (Houston) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के स्वागत में ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ और पूरी दुनिया में उसकी चर्चा हुई क्योंकि अमेरिकी ज़मीन पर किसी विदेशी राजनीतिक के लिए इतने बड़े स्तर पर पहले कभी ऐसा आयोजन नहीं हुआ था. सिर्फ यही नहीं, इस कार्यक्रम के बहाने भारत और अमेरिका (India & US) के बीच संबंधों की एक नई इबारत लिखी गई. अब सवाल ये है कि इस आयोजन के पीछे किसकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी.
पीएम मोदी (PM Modi) के कार्यक्रम के बहाने कई निशाने साधने वाले इस कार्यक्रम (Mega Event) का विचार एक व्यक्ति का था लेकिन एक संस्था और कई दानदाताओं (Donors) ने इसे साकार किया.
भारतीय विदेश सेवाओं (IFS) के 1984 बैच के अधिकारी और पेशे से कूटनीतिज्ञ (Diplomat) रहे हर्षवर्धन श्रिंगला (Harsh Vardhan Shringla) का नाम इस आयोजन के सूत्रधारों में लिया जा रहा है. मिंट की एक खबर की मानें तो अपने साथियों के बीच ‘नो बकवास’ और ‘तेज़ दिमाग’ जैसी छवि रखने वाले अमेरिका में भारत के राजदूत (Ambassador) श्रिंगला ने न केवल इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की बल्कि भारत और अमेरिका के संबंधों (Indo-US Relations) को इस बहाने से आगे ले जाने का बीड़ा भी उठाया. श्रिंगला के बारे में कुछ और ज़रूरी बातों के साथ ये भी जानिए कि किस संस्था (Organisation) ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को साकार रूप दिया.
हाउडी मोदी कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंच साझा किया.
हाउडी मोदी के बहाने:
मीडिया में आ रही खबरों में कहा जा रहा है कि हाउडी मोदी जैसे कार्यक्रम का विचार श्रिंगला का ही था और इसके लिए उन्होंने कुछ संस्थाओं को एकजुट करवाकर आयोजन को अंजाम देने का रास्ता बनाया. ये कार्यक्रम सिर्फ मोदी के स्वागत के लिए नहीं था बल्कि इसके बहाने कई लक्ष्य भेदे गए. मिंट की ही खबर की मानें तो इस कार्यक्रम के चलते भारत और अमेरिका के बीच साढ़े सात अरब डॉलर की एनर्जी डील की संभावना, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मोदी की एक और मुलाकात और बड़ी अमेरिकी कंपनियों के प्रमुखों के साथ बातचीत के रास्ते भी खुले.
कई देशों में रह चुके हैं राजनयिक:
अमेरिका में भारत के राजदूत बनने से पहले श्रिंगला बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त रह चुके थे. उनके इस कार्यकाल में दोनों देशों के बीच विकास के कुछ अहम प्रोजेक्ट तैयार हुए. 2011 से 2013 के बीच बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और म्यांमार में संयुक्त सचिव श्रिंगला रहे, उसी दौरान बांग्लादेश के साथ 1974 के भूमि सीमा समझौते पर एक महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हस्ताक्षर किए थे.
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अमेरिका (USA) के ह्यूस्टन (Houston) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के स्वागत में ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ और पूरी दुनिया में उसकी चर्चा हुई क्योंकि अमेरिकी ज़मीन पर किसी विदेशी राजनीतिक के लिए इतने बड़े स्तर पर पहले कभी ऐसा आयोजन नहीं हुआ था. सिर्फ यही नहीं, इस कार्यक्रम के बहाने भारत और अमेरिका (India & US) के बीच संबंधों की एक नई इबारत लिखी गई. अब सवाल ये है कि इस आयोजन के पीछे किसकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी.

वर्तमान में अमेरिका में भारत के राजदूत के तौर पर पदस्थ हर्षवर्धन श्रिंगला.
इसके अलावा श्रिंगला थाईलैंड में भारत के राजदूत के तौर पर भी सेवाएं दे चुके हैं. यूनेस्को के साथ ही श्रिंगला भारत के वियतनाम, इज़रायल और दक्षिण अफ्रीका के मिशन को लेकर संयुक्त राष्ट्र से भी जुड़ चुके हैं.
अब अंजाम देने वाली संस्था की बात:
हाउडी मोदी जैसे विश्व स्तरीय इवेंट को अंजाम देने के पीछे टैक्सास इंडिया फोरम (TIF) संस्था रही. इस संस्था ने श्रिंगला के दूतावास के साथ ही ह्यूस्टन में स्थित भारतीय कॉंसुलेट के साथ मिलकर काम किया और एक ऐसे कार्यक्रम को अंजाम दिया, जिसमें 50 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने शिरकत की.
क्या है ये फोरम और कैसे बना?
इस फोरम के अध्यक्ष जुगल मालानी हैं और उनकी मानें तो हाउडी मोदी के आयोजन को किसी एक खास बैनर के तले नहीं करवाए जाने की योजना थी इसलिए इस फोरम को इसी कार्यक्रम के लिए खास तौर से बनाया गया. मालानी के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि इस कार्यक्रम के लिए भारतीय अमेरिकियों और अमेरिकियों से अनुदान लिया गया और इस आयोजन की रूपरेखा के चलते करीब 24 लाख डॉलर की रकम जुटाई गई. इसी फोरम ने हाउडी मोदी कार्यक्रम के लिए एक वेबसाइट भी बनवाई.
मालानी के हवाले से ये भी किया गया कि किसी भी दानदाता से कुल रकम का 10 से 15 फीसदी से ज़्यादा हिस्सा नहीं लिया गया. इस फोरम में ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी के चांसलर और प्रेसिडेंट रेणु खाटोर, चिन्मय मिशन के आचार्य गौरांग नानावटी, बिज़नेसमैन रमेश भुटाड़ा, काउंटी जज केपी जॉर्ज, गुरुद्वारा कमेटी सदस्य पॉल लेखरी, बोहरा समुदाय के नेता अबिज़र तय्यब और स्टैफोर्ड शहर के निर्वाचित अधिकारी केन मैथ्यूज़ जैसे सदस्य शामिल रहे|

                Howdy Modi

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