Delhi Police vs lawyers: अदालत ने कहा, तीन नवंबर के फैसले पर स्पष्टीकरण की जरूरत नहीं/ वकील-पुलिस के झगड़े में अपराधियों की मौज, गिरफ्तार करने से बच रही पुलिस

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सेफ ओर सिक्योर फरीदाबाद क्राइम न्यूज, दिनांक 06 नवंबर 2019 |हनीश|
Delhi Police vs lawyers: मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने आदेश पर स्पष्टीकरण और समीक्षा की मांग को लेकर केंद्र की अर्जियों का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि तीस हजारी अदालत परिसर में पुलिस और वकीलों के बीच हुई झड़प पर तीन नवंबर को दिए गए फैसले को लेकर स्पष्टीकरण की जरूरत नहीं है और यह अपने आप में स्पष्ट है। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने आदेश पर स्पष्टीकरण और समीक्षा की मांग को लेकर केंद्र की अर्जियों का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की।
तीन नवंबर के आदेश में कहा गया था कि तीस हजारी अदालत परिसर में दो नवंबर को पुलिस और वकीलों के बीच झड़प के संबंध में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर वकीलों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जायेगी। अपनी अर्जी में केंद्र ने उच्च न्यायालय से इस स्पष्टीकरण का अनुरोध किया था कि तीन नवंबर को पारित आदेश दो नवंबर की झड़प के बाद की घटनाओं पर लागू नहीं होना चाहिए।
साकेत अदालत के बाहर सोमवार और मंगलवार को एक ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी और एक आम नागरिक की कथित रूप से वकीलों द्वारा पिटाई की घटना के बाद मंगलवार को पहली अर्जी दायर की गयी। केंद्र ने दूसरी अर्जी बुधवार को दायर की जिसमें तीन नवंबर के आदेश में बदलाव का अनुरोध किया गया था। आदेश में झड़प से संबंधित दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले की बात कही गयी थी।
अदालत ने दोनों अर्जियों को सुनने के बाद कहा कि इस संबंध में न्यायिक जांच पहले ही शुरू की जा चुकी है और जांच कर रही समिति तीन नवंबर के आदेश में उसकी टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होगी। मामले में विस्तृत आदेश का इंतजार है। सुनवाई के दौरान अदालत खचाखच भरी हुई थी। तीस हजारी अदालत परिसर में दो नवंबर को वकीलों और पुलिस के बीच झड़प के विरोध में बुधवार को लगातार तीसरे दिन दिल्ली की छह जिला अदालतों में वकीलों ने काम का बहिष्कार किया और कुछ अदालतों में लोगों को याचिका दायर करने से रोका।

दोषी पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर गिरफ्तार करो
बीसीआई ने कहा कि दोषी पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर गिरफ्तार किया जाना चाहिये। बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इससे पहले बीसीआई ने दिल्ली के बार संघों से अपनी हड़ताल समाप्त करने को कहा था, लेकिन ‘दिल्ली पुलिस के आचरण’ को देखने के बाद वह मामले में हाथ पर हाथ धरे बैठी नहीं रह सकती है।
उच्च न्यायालय यह कहा
उच्च न्यायालय ने केन्द्र की उस याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें उसने तीन नवम्बर को दिए गए उसके आदेश का स्पष्टीकरण मांगते हुए उस पर पुन: विचार की मांग की थी । दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि तीन नवम्बर को दिए उसके आदेश को स्पष्ट करने की जरूरत नहीं है, वह अपने आप में स्पष्ट है।
हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की

अब अलवर में भिड़े पुलिस और वकील
दिल्ली में वकील के पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन असर यूपी, हरियाण के बाद अब राजस्थान में भी हुआ है। यहां अलवर में हरियाणा पुलिस के एक जवान के साथ वकीलों ने हाथापाई हुई है। इसके बाद से वकील और पुलिसकर्मी आमने-सामने आ गये है।
अदालत में लोगों को आने से रोका नहीं जा रहाः बार एसोसिएशन सचिव
दिल्ली बार एसोसिएशन ऑफ तीस हजारी के सचिव जयवीर सिंह चौहान ने कहा कि लोगों को अदालत परिसर में प्रवेश करने की अनुमति है। हम शांतिपूर्वक अपना प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों को अदालत कक्ष में भी आने से रोका नहीं जा रहा है।
वकीलों का प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी, दोषी पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों में वकीलों का प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली की 6 में तीन जिला अदालतों में कामकाज पूरी तरह से बाधित रहा। वकील 2 नवंबर को तीस हजारी कोर्ट में हुए विवाद के बाद दोषी पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
हिंसा की घटना बर्दाश्त नहीं की जाएगीः बार काउंसिल
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने दिल्ली के जिला अदालतों में वकीलों के विरोध प्रदर्शन पर कड़ा संज्ञान लिया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया का कहना है कि हिंसा की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। काउंसिल ने कहा कि इन मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रोहिणी कोर्ट की बिल्डिंग पर चढ़ा वकील
दिल्ली में वकीलों का प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। रोहिणी कोर्ट में वकीलों के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक वकील अदालत की बिल्डिंग के ऊपर चढ़ गया। बिल्डिंग के ऊपर चढ़ने के बाद यह वकील आत्महत्या की धमकी देने लगा।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय की सुरक्षा बढ़ी, CRPF की होगी तैनाती
केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस मुख्यालय की सुरक्षा के लिए अब सीआरपीएफ की तैनाती की जाएगी।
मद्रास हाईकोर्ट की तरह तीस हजारी की सुरक्षा सीआईएसएफ को दी जा सकती है: पूर्व सीजेआई
पूर्व प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन ने मंगलवार को सुझाव दिया कि मद्रास उच्च न्यायालय की तरह तीस हजारी अदालत परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को सौंपी जा सकती है। दिल्ली की तीस हजारी अदालत में पुलिसर्किमयों और वकीलों के बीच हुई झड़प और इस मामले के बड़ा रूप ले लेने के बाद उनका यह सुझाव आया है।

पुलिसर्किमयों के परिवारों ने निकाला मार्च
दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन करने वाले पुलिसर्किमयों के परिवार के सदस्यों ने उनके समर्थन में इंडिया गेट पर मोमबत्ती जलाई और फिर मार्च किया। भारी तादाद में पुलिस कर्मियों ने लगभग 11 घंटे तक पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। विद्रोह जैसी यह स्थिति हाल ही में उनके सहर्किमयों पर हुए दो हमलों के बाद उपजी थी। एक प्रदर्शनकारी की पत्नी ऋतु सिंह ने नम आंखों और रुंधे गले से कहा कि उनके पति अपने बच्चों के स्कूल में एक भी अभिभावक-शिक्षक बैठक में शामिल नहीं हुए।
साकेत कोर्ट में वकीलों ने बंद किए दरवाजे
कोर्ट में वकीलों ने अदालत के सभी दरवाजे बंद कर दिए हैं। इस वजह से यहां कामकाज ठप हो गया है। इससे पहले बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने वकीलों को हड़ताल नहीं करने को कहा था। हालांकि, वकीलों ने बार काउंसिल की बात नहीं मानी।
किरन बेदी ने किया ट्वीट
पुड्डुचेरी की राज्यपाल और दिल्ली पुलिस की पूर्व कमिश्नर ने किरन बेदी ने इस मामले में ट्वीट किया। बेदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि अधिकार और उत्तरदायित्व एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक नागरिक के रूप में हमें इन्हें भूलना नहीं चाहिए। हम जो भी हो, जहां कहीं भी हों अगर हम सभी कानून का पालन करते हैं तो कोई विवाद नहीं होता है।
हाईकोर्ट में दायर करेंगे समीक्षा याचिकाः दिल्ली पुलिस
इससे पहले दिल्ली पुलिस की तरफ से कहा गया था कि वह हाईकोर्ट में समीक्षा याचिका दायर कर तीस हजारी कोर्ट की घटना के बाद पीड़ित पुलिसकर्मियों को वकीलों के समान सुविधाएं दिए जाने की मांग करेगी। इसमें न्यायिक जांच पूरी होने तक किसी भी पुलिसकर्मी को गिरफ्तार नहीं करने, घायलों को आर्थिक मदद देने और बेहतर इलाज देने की बात शामिल है।
पुलिस कर्मियों के स्वाभिमान की रक्षा करेंगेः पटनायक
दिल्ली पुलिस के कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने पुलिसकर्मियों के समर्थन में ट्वीट किया। पटनायक ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘दिल्ली पुलिस हमेशा अपनी कर्मठता और कार्यकुशलता के लिए जानी जाती है। हम सब इसकी प्रतिष्ठा को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं।’ पटनायक ने अपने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि दिल्ली पुलिस का शीर्ष नेतृत्व आपके साथ है और हम मिलकर अपने स्वाभिमान और जन सम्मान की निरंतर रक्षा करते रहेंगे।
Delhi Police vs Lawyers: 15 CCTV वीडियो हैं, जो झूठ नहीं बोल रहे!

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इन दिनों दिल्ली में पुलिस (Delhi Police) और वकील (Advocates) आमने-सामने हैं. वैसे तो इन दोनों की कभी भी पटती नहीं है, लेकिन इस बार मामला मारपीट (Delhi Police and Lawyers fight) तक पहुंच गया है. शनिवार को इसकी शुरुआत हुई थी दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट से. शनिवार को ही बार काउंसिल के चुनाव की कैपेंनिंग की आखिरी तारीख थी. ऐसे में प्रचार तेजी से हो रहा था और इस वजह से कोर्ट और पार्किंग तक पूरी तरह से भर गई थीं. तभी कोर्ट के आउट गेट क पास बने लॉकरूम के सामने एक आकर रूकी, जो पुलिसवैन के बिल्कुल बगल में पार्क की गई. आपको बता दें कि लॉकरूम में विचाराधीन कैदियों को पेशी के लिए लाकर रखा जाता है और गाड़ियों को ऐसे खड़ा किया जाता है कि अगर कोई अपराधी भागने की कोशिश करे तो उसे तुरंत ही पकड़ा जा सके. ऐसे में सुरक्षा के मद्देनजर लॉकअप के आसपास पुलिस के अलावा किसी को भी गाड़ी खड़ी करने की इजाजत नहीं होती है. कई बार बदमाश दूसरा भेष धारण कर के भी अपने साथियों को भगाने की कोशिश करते हैं.
दिल्ली CP को नोटिस, प्रदर्शन में शामिल जवानों पर एक्शन की मांग:
तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच हुआ विवाद अभी थमा नहीं है. मंगलवार को दिल्ली पुलिस के जवानों ने पुलिस हेडक्वार्टर पर प्रदर्शन किया, अब इसी को लेकर दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को लीगल नोटिस भेजा गया है. सुप्रीम कोर्ट में वकील वरुण ठाकुर ने इस मामले में लीगल नोटिस भेजा है, जिसमें लिखा गया है कि पुलिस के आला अधिकारियों ने वकीलों के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए हैं.
इसके अलावा नोटिस में मांग की गई है कि धरने में जो पुलिस जवान शामिल हुए हैं, उनकी पहचान की जाए और कार्रवाई की जाए. साथ ही ये भी कहा गया है कि पुलिस का इस तरह से प्रदर्शन लोगों के मन में डर पैदा करता है, ये लोकतंत्र के लिए खतरा है. नोटिस में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने प्रदर्शन कर रहे जवानों पर कोई एक्शन नहीं लिया.
आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस के जवानों ने वकीलों के द्वारा किए जा रहे हमले के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन किया था. जवानों ने मांग की थी कि उनके साथ बदसलूकी करने वाले वकीलों पर एक्शन लिया जाए, तीस हजारी कोर्ट हिंसा के दौरान जिन पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज किया गया है वो वापस लिया जाए.

फरीदाबाद: दिल्ली पुलिस की बर्बरता के खिलाफ लघु सचिवालय सैक्टर-12, मैन गेट पर दिल्ली पुलिस का पुतला फूंका, कडे शब्दों में निन्दा की, दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर नारे लागाये और तीस हजारी कोर्टघ्के वकील भाईयों का समर्थन किया। बार कॉन्सिल पंजाब एण्ड हरियाणा के पूर्व मनोनित सदस्य शिवदत्त वशिष्ठ एडवोकेट ने कहा कि सरकार से अपील की कि अधिवक्ता सुरक्षा कानून को जल्द से जल्द पारित करें। ताकि ऐसी घटना दूबारा से ना हो। वशिष्ठ ने कहा कि पुलिस ने वकील के उपर सीधी गोली चलाकर और वकीलों को वकीलों के चैम्बरों में ही लाठी डन्डों से पीटना पुलिस गुंडागर्दी को दर्शाता है। पुलिस वालों ने पुलिस मुख्यालय पर एकत्रित होकर के वकीलों पर दबाव बनाया जा रहा है और उनके खिलाफ झूंठे मुकदमें दर्ज करने व अपने उपर दर्ज मुकदमों कों कैंसिल कराने की रणनीति है। जिला बार एसोसियसन कें महासचिव नरेन्द्र पाराशर ने कहा की फरीदाबाद का हर वकील साथी दिल्ली के वकीलों के साथ है। इस मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता कॅवर दलपत सिंह, पूर्व महासचिव सतबीर शर्मा, अनिल पाराशर, बिजेन्द्र पाराशर, कोकल पाराशर, सतीश चौहान, वी$डी$ पाराशर, संजय दीक्षित, लक्षण तंवर, मुवीन खान, विजय यादव, कुलदीप जोशी, मनोज कुमार, आशिष, सतपाल नागर, अफाक खान, हरदीप विसोया, पवन कौशिक, धर्म सिंह, प्रवीन त्यागी, व आदि सैण्कडों अधिवक्ता मौजूद थे।

दिल्ली पुलिस को किरण बेदी का सपोर्ट, बताईं, 31 साल पहले क्यों चली थीं वकीलों पर लाठियां:
-दिल्ली पुलिस के समर्थन में आईं किरण बेदी
-‘नतीजा कुछ भी हो रुख पर कायम रहे
-दिल्ली पुलिस’31 साल पुरानी घटना का किया जिक्र
दिल्ली पुलिस में सीनियर ऑफिसर रह चुकीं किरण बेदी दिल्ली पुलिस के जवानों के समर्थन में आ गई हैं. उन्होंने तीस हजारी कोर्ट में पुलिस-वकीलों की हिंसक झड़प पर दिल्ली पुलिस को सलाह दी है कि पुलिस अपने रुख पर दृढ़ता से कायम रहे चाहे नतीजा कुछ भी हो. बता दें कि दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर पुदुचेरी में बैठीं किरण बेदी के पोस्टर मंगलवार को पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे कई पुलिसकर्मियों ने थाम रखा था. ये पुलिसकर्मी नारा लगा रहे थे, ‘किरण बेदी शेरनी हमारी’, ‘हमारा पुलिस कमिश्नर कैसा हो, किरण बेदी जैसा हो’. बता दें कि बेदी अभी पुदुचेरी की उपराज्यपाल हैं. आखिर वकीलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मी किरण बेदी को क्यों याद कर रहे थे?
जब ‘वकील’ को पहनाई गई थी हथकड़ी
दरअसल किरण बेदी को याद करने के पीछे एक कहानी है. ये कहानी 31 साल पुरानी है और इस कहानी के तार भी तीस हजारी कोर्ट से जुड़े हैं. उस दौरान भी राजधानी में काला कोर्ट वर्सेज खाकी वर्दी की नौबत आ गई थी. तब किरण बेदी ने बिना किसी दबाव के झुके पुलिसकर्मियों के पक्ष में बयान दिया था. बात 1988 की है. आईपीएस किरण बेदी तब दिल्ली में डीसीपी नॉर्थ के पद पर तैनात थीं. 15 जनवरी 1988 को पुलिस ने एक वकील को सेंट स्टीफेंस कॉलेज से एक लड़की का पर्स चुराते हुए गिरफ्तार किया था. जब 16 जनवरी को इस वकील को हथकड़ी लगाकर तीस हजारी कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो वहां के वकील भड़क गए और उन्होंने तत्काल आरोपी वकील को छोड़ने की मांग की और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. मजिस्ट्रेट ने वकील को उसी दिन छोड़ दिया और दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ एक्शन लेने को कहा.
लाठी चार्ज में वकील हुए थे घायल
18 जनवरी को वकील अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए. किरण बेदी ने 20 जनवरी को एक बयान जारी किया और पुलिस के एक्शन को सही करार दिया, उन्होंने कथित ‘चोर’ को छोड़ने के लिए मजिस्ट्रेट की आलोचना भी की. 21 जनवरी को कुछ वकील किरण बेदी से उनके दफ्तर में मिलना चाहते थे. उस दौरान किरण बेदी का दफ्तर तीस हजारी कोर्ट कॉम्पलेक्स में ही मौजूद था. तब लाठी चार्ज का आदेश दे दिया गया. इसमें कई वकील घायल हो गए थे. इसके बाद दिल्ली में हंगामा हो गया. वकील किरण बेदी के इस्तीफे की मांग करते रहे, और 2 महीने तक काम नहीं किया.
वकीलों ने किरण बेदी पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया, लेकिन किरण बेदी ने कहा कि वकील उनके दफ्तर में जबरन घुस आए थे, वे गालियां दे रहे थे और कपड़े फाड़ दे रहे थे, इसके बाद पुलिस को मजबूरन बल प्रयोग करना पड़ा.
आखिरकार इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट को दखल देना और मामले की जांच करने के लिए दो जजों की एक कमेटी गठित की गई. इस कमेटी ने कहा कि आरोपी वकील को हथकड़ी लगाना गलत था. कमेटी ने किरण बेदी के ट्रांसफर की भी सिफारिश की.
दबाब के आगे नहीं झुकीं
इस घटना को याद करते हुए एलजी किरण बेदी ने एक न्यूज एजेंसी से कहा कि वकीलों की ओर से उनपर बहुत दबाव बनाया गया, लेकिन वे अपने रुख पर कायम रहीं और झुकने से इनकार कर दिया. किरण बेदी ने कहा कि वकील हथकड़ी पहनाने वाले पुलिसकर्मी के निलंबन/गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे. लेकिन वे नहीं झुकीं.
अपने रूख पर कायम रहे दिल्ली पुलिस-बेदी
उस घटना को याद करते हुए किरण बेदी ने अपना पक्ष रखा, “गिरफ्तारी के वक्त उस शख्स ने अपना परिचय एक वकील के रूप में नही दिया था, उस शख्स ने पुलिस को अपना नाम भी दूसरा बताया था.” किरण बेदी ने कहा कि उस वक्त के पुलिस कमिश्नर वेद मारवाह पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़े रहे. तीस हजारी कोर्ट की मौजूदा घटना के बाद किरण बेदी ने दिल्ली पुलिस को सलाह दी है कि वह अपने रुख पर दृढ़ता से कायम रहे चाहे नतीजा कुछ भी हो.
दिल्ली में वकीलों और पुलिस के झगड़े में अपराधियों की मौज हो रही है। अदालत में पेशी न होने के कारण पुलिस विभिन्न केसों में वांछित अपराधियों को पकड़ने से बच रही है। कोई बड़ा मामला है तभी अपराधियों पर हाथ डाला जा रहा है। ऐसे मामलों में ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष उन्हें पेश कर दिया जाता है। ये पेशी भी अदालत में न होकर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के घर पर हो रही है।
गिरफ्तारी के 24 घंटों के अंदर पेशी
अदालत में वकीलों ने हड़ताल कर दी है और वे किसी को अंदर नहीं घुसने दे रहे हैं। यही वजह है कि पुलिस छोटे मोटे मामलों में अपराधियों को पकड़ने से बच रही है। अगर पुलिस किसी अपराधी को पकड़ती है, तो उसे 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना पड़ता है। बता दें कि दिल्ली की जिला अदालतों में सोमवार से लेकर अभी तक पुलिस को घुसने नहीं दिया जा रहा है।
छोटे मामलों में गिरफ्तारी नहीं
इस मामले में छह पुलिस अधिकारियों, जिनमें चार थानाध्यक्ष, एक एसीपी और एक डीसीपी हैं, से बातचीत की गई है। इन सभी का कहना है कि पिछले तीन दिन से जो हालात बन रहे हैं, उनमें केवल बड़े मामलों में ही गिरफ्तारी की जा रही है। जिन मामलों की तफतीश चल रही है, उनमें अभी किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा। इसी तरह अपराध की छोटी घटनाएं जैसे स्नेचिंग, मारपीट, चोरी, आर्थिक अपराध, साइबर क्राइम और घरेलू हिंसा आदि मामलों में पुलिस गिरफ्तारी की ओर नहीं जा रही।
यहां तक कि स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच भी छोटे अपराधियों पर अपना ज्यादा ध्यान नहीं दे रही है। स्पेशल सेल ने तीन नवंबर को आखिरी गिरफ्तारी की थी। यह गिरफ्तारी लूट के एक मामले में की गई थी।
मंगलवार को हुई केवल 96 गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस की अधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक दिल्ली के विभिन्न जिलों में 186 थाने हैं। इनमें पांच नवंबर को 96 अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं। पश्चिमी दिल्ली से नौ, दक्षिण पूर्व से चार, दक्षिण पश्चिम में दो, दक्षिण दिल्ली से चार, शाहदरा से चार, बाहरी दिल्ली से 10, उत्तर पश्चिम से एक, उत्तर पूर्व जिले से 53, उत्तरी जिले से तीन, एयरपोर्ट से दो, पूर्वी दिल्ली से तीन, मध्य जिला, नई दिल्ली और उत्तर बाहरी में कोई भी अपराधी गिरफ्तार नहीं हुआ।

सेफ ओर सिक्योर ग्रुप फरीदाबाद से मीडिया कोऑर्डिनेटर हनीश भाटिया की सभी देश वासियों से अपील है कि शांति बनाए रखे, अफवाहों पर ध्यान नहीं दे, घटना का राजनीतिकरन ना होने दे और जो भी दोषी हो उन्हें सख्त कार्रवाई की जावे क्यूंकि शहर हमारा, जिम्मेदारी हमारी|
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