नागरिक संशोधन बिल पारित होने पर हिन्दू शरणाथियों ने किया केंद्रीय राज्यमंत्री का स्वागत: फरीदाबाद

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सेफ ओर सिक्योर फरीदाबाद क्राइम न्यूज, दिनांक 13 दिसंबर 2019 |हनीश|
फरीदाबाद: नागरिकता संशोधन बिल (सीएबी) के संसद के दोनों सदनों से पारित होने व राष्ट्रपति द्वारा इसे मंजूरी देने के बाद बने कानून का पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से आकर यहां रह रहे हिन्दू शरणार्थियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया है क्योंकि अब वे भारतीय नागरिक बन गए हैं। शुक्रवार को ऐसे ही करीब 80 अफगानी शरणार्थियों ने केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के सेक्टर-28 स्थित कार्यालय पर उनसे मुलाकात कर केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर केंद्रीय राज्यमंत्री ने सभी का मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया। इन शरणार्थियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया तथा ढोल की थाप पर नाच-गाकर अपनी खुशी का इजहार किया।
हेमंत मालवीय की कलम से: पहले समंझ तो लीजिये NRC यानी क्या है , ये मात्र जनसंख्या का जन गणना का बहीखाता हैं , शाह जान बूझ कर गलत बयानी कर रहे हैं , 1947 में कोई जनगणना नही हुई क्योकि,41 में हुई थी उसके बाद 1951 में ही होनी थी तभी हुई ,47 में तो दंगे औऱ विभाजन हुआ , तब भी अविभाजित देश मे 66% हिन्दू आबादी थी ।
51 की भारत की जनसंख्या को 361,088,0 9 0 (1: 0.946 पुरुष: महिला) के रूप में गिना गया था। कुल जनसंख्या 42,427,510 की वृद्धि हुई, 1941 की जनगणना के दौरान 318,660,580 लोगों की तुलना में 13.31% अधिक थी।
1951 में जम्मू और कश्मीर के लिए कोई जनगणना नहीं हुई थी और इसके आंकड़े 1941 और 1961 की जनगणना से अलग हो गए थे।
“””””जनगणना के तुरंत बाद भारतीय राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) तैयार किया गया था।””’
1951 में, पहली जनगणना जनगणना के समय, केवल 18% भारतीय साक्षर थे जबकि जीवन प्रत्याशा 32 वर्ष थी।
विस्थापित व्यक्तियों की 1951 की जनगणना के आधार पर, 7,226,000 मुसलमान भारत से पाकिस्तान (पश्चिम और पूर्व दोनों) गए, जबकि 7,249, 000 हिंदू और सिख पाकिस्तान (पश्चिम और पूर्व दोनों) से भारत चले गए।
NRC नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप यानी भारत की 1951 की जनगणना भी 1871 के बाद से हर दशक में भारत में आयोजित सेंसस की श्रृंखला में 9वीं थी यानी आजादी आते आते NRC 9 अंग्रेजो द्वारा बार आयोजित की जा चुकी थी,। हर जनगणना के समय सरकारी कर्मचारी घर घर आते है औऱ तस्दीक करते है ये कयावद
1951से NRC हर दशक जारी हैं, नागरिकता रजिस्टर तो 1951 से ही सरकार के पास है । तो इतना हंगामा क्यो है इस बार
क्योकि 3करोड़ जनसंख्या वाले असम का NRC बांग्लादेश से आये शरणार्थी ,घुसपैठ समस्या के कारण अलग ही तरीके से आयोजित हुआ , जब नागरिकों को ही लाइनों में लगा कर सारे डॉक्यूमेंट जमा करने को कहा गया,
इस सब मे 19 लाख लोग कोई दस्तावेज प्रस्तुत नही कर पाए , अगर इस एवरेज को 135 करोड़ लोगों पे लागू किया गया तो कई करोड़ लोग कोई दस्तावेज प्रस्तुत नही कर पाएंगे,
अब पूरे देश मे NRC पे ये पैनिक केवल राजनीति फायदे के लिए रचा जा रहा है । ये एक सामान्य सी हर दशक में होने वाली जनगणना, जिसे 2021 में होना ही है,
किसी भी हाल में सरकार की इतनी हिम्मत नही होनी चाहिये वह असम की तर्ज पे जनता को लाइनों में लगा दे , अगर सरकार देश मे असम की तर्ज पर ही सारी कवायद करती है।
तो बेहद देश की जनता को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, जिस तरह से सामान्य सी नोटबदली,नोटबन्दी में बदल गई ,लाइनों में लोग मारे गये, परेशान हुए ,अशिक्षित भोली,
जनता इतनी मूरख है कि कौआ कान ले गया तो आसमान में कौआ देखने लगती हैं ! हर अफवाह वाट्सप संदेश पे यकीन करती है ,अगर सरकार चाहेगी तो देश मे असम की तर्ज पे भयंकर अराजकता शुरू होगी, औऱ जिस तरह की यह सरकार है उसे ये करने में कतई कोई डर है …लग तो नही रहा शायद यही सब वो चाहती है । क्योकि इससे सरकार चलाने वाली पार्टी संघ संगठन का का जन सम्पर्क ही बढ़ेगा, केवल जनता परेशान होकर इनके नेताओं के चरणों मे खड़ी होगी, । इससे भाजपा की ताकत औऱ देश की परेशानी ही बढ़ेगी ।
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राजेश वशिष्ठ उर्फ बिल्लू – ब्यूरो चीफ/प्रेसिडेंट सेफ ओर सिक्योर ग्रुप फरीदाबाद: 88606-11484