चंद्रयान-2 लॉन्च से पहले श्रीहरिकोटा में बूंदा-बांदी शुरू: Chandrayaan-2 Launch LIVE Updates on SSF CRIME NEWS

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सेफ ओर सिक्योर फरीदाबाद क्राइम न्यूज, दिनांक 14 जुलाई 2019 |राजेश वशिष्ठ के साथ हनीश की रिपोर्ट|

ISRO Chandrayaan-2 mission launch live: चंद्रयान 2 लॉन्च होने में अब कुछ ही घंटे बचे हैं. रात 2.51 बजे इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से छोड़ा जाएगा. 44 मीटर लंबा और 640 टन वजनी जीएसएलवी-एमके-3 रॉकेट को ‘बाहुबली’ और ‘फैट ब्वॉय’ नाम भी दिया गया है. इसमें 3,870 किलो का चंद्रयान है. 375 करोड़ रुपये का जीएसएलवी-मार्क 3 रॉकेट 603 करोड़ रुपये के चंद्रयान-2 के साथ उड़ान भरेगा. धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी लगभग 3.84 लाख किलोमीटर है. वहां से चंद्रमा के लिए लंबी यात्रा शुरू होगी. चंद्रयान-2 में लैंडर-विक्रम और रोवर-प्रज्ञान को लेकर चंद्रमा तक जाएगा. लैंडर-विक्रम 6 और 7 सितंबर को चांद पर पहुंचेगा और उसके बाद वह जानकारी भेजना शुरू करेगा.

Highlights
-चंद्रयान-2 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है.

-रात 2 बजकर 51 मिनट पर चंद्रयान-2 लॉन्च किया जाएगा.
-आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से इसे अंतरिक्ष में भेजा जाएगा.
-कुल पूरे मिशन की कुल लागत 976 करोड़ रुपये है.

 

चंद्रयान-2 की लांचिंग देखने पहुंचने लगे लोग चंद्रयान-2 की लांचिंग के ऐतिहासिक पलों का गवाह बनने के लिए लोग सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पहुंचने लगे हैं.

7 सैटेलाइट जो सुदूर ग्रहों के अध्ययन के लिए छोड़े गए

इसरो के वैज्ञानिकों ने 1987 से अब तक सुदूर ग्रहों के अध्ययन के लिए 7 उपग्रह लॉन्च किए हैं. शुरुआती चार उपग्रह प्रायोगिक थे. इसके बाद 22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान-1 लॉन्च किया गया. 2013 में मंगलयान और 2015 में एस्ट्रोसेट का प्रक्षेपण किया गया. 1987 से अब तक सिर्फ एक लॉन्चिंग ही फेल हुई थी. उसके बाद से एक भी नहीं.

ISRO मिशन 2.0 से नया इतिहास रचने को तैयार

श्रीहरिकोटा में इसरो के दूसरे चंद्र अभियान, चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग की तैयारी पूरी है. भारी लिफ्ट रॉकेट को ‘बाहुबली’ का उपनाम दिया गया है.

9 नेविगेशन उपग्रह, जो दिखा रहे हैं नए भारत को रास्ता

इसरो ने देश की सेना, नौसेना, वायुसेना, कार्गो सुविधाओं, पानी के जहाजों, छोटे नाविकों, नागरिक विमानन के लिए गगन और आईआरएनएसएस-नाविक जैसे नेविगेशन उपग्रह प्रणाली विकसित कर लॉन्च कर चुकी है. गगन प्रणाली की सुविधाएं जीसेट-8 और जीसेट-10 के ट्रांसपोंडर्स के जरिए ली जा रही हैं. वहीं, आईआरएनएसएस-नाविक के 8 सैटेलाइट काम कर रहे हैं. ये हैं- IRNSS-1A, 1B, 1C, 1D, 1E, 1F, 1G और 1I.

36 अर्थ ऑब्जरवेशन उपग्रह जिन्होंने ढांचागत विकास और सेना की मदद की

1988 में पहला अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट छोड़ा गया था. तब से लेकर अब तक 36 अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े गए. इनमें से 17 अभी भारत की निगरानी कर रहे हैं. इनमें शामिल हैं – रिसोर्ससेट-1, 2, 2ए, कार्टोसेट-1, 2, 2ए, 2बी, रीसेट-1 और 2, ओशनसेट-2, मेघाट्रॉपिक्स, सरल, स्कैटसेट-1, इनसेट-3डी, कल्पना, इनसेट-3ए, इनसेट-3डीआर. ये सभी उपग्रह कृषि विकास, शहरी और ग्रामीण विकास की योजनाओं, जलस्रोत, खनिज संपदा, पर्यावरण, जंगल और आपदा प्रबंधन में मदद करते हैं. इनमें से रीसेट और कार्टोसेट सैटेलाइट्स का उपयोग पाकिस्तान में मौजूद आंतकियों पर सर्जिकल और एयर स्ट्राइक के लिए किया गया था. 36 मिशन में से सिर्फ 2 मिशन ही फेल हुए.

41 संचार उपग्रह जिन्होंने दी इंटरनेट, टीवी, मौसम पूर्वानुमान आदि सेवाएं

इसरो के वैज्ञानिकों में आजादी के बाद से अब तक संचार व्यवस्था को लेकर 41 उपग्रह छोड़े. जिनमें से अभी 15 काम कर रहे हैं. ये 15 सैटेलाइट हैं- INSAT-3A, 3C, 4A, 4B, 4CR और इसी प्रणाली के अंदर आने वाले GSAT-6, 7, 8, 9, 10, 12, 14, 15, 16 और 18. ये सभी सैटेलाइट 200 ट्रांसपोंडर्स की मदद से टेलीफोन, मोबाइल, टीवी, समाचार, आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान जैसे कार्यों में मदद कर रहे हैं. यही नहीं, अभी हाल ही में ओडिशा में आए चक्रवाती तूफान की निगरानी के लिए इसरो ने पांच उपग्रह लगाए थे. तभी लाखों लोगों की जान बचाई जा सकी.

ISRO ने अब तक छोड़े 370 उपग्रह

इसरो ने अब तक अंतरिक्ष में कुल 370 उपग्रह छोड़े हैं. इनमें 101 देसी और 269 विदेशी सैटेलाइट हैं. मून मिशन चंद्रयान-2 अगर सफल होता है इनकी संख्या बढ़कर 371 हो जाएगी. इसरो ने देश के लिए कुल 101 सैटेलाइट लॉन्च किए हैं. जिनमें संचार, आपदा प्रबंधन, इंटरनेट, रक्षा, मौसम, शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों को सेवाएं देने वाले उपग्रह हैं.

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किसी भी प्रकार की खबर सांझा करने के लिए संपर्क करे; — हनीश भाटिया – चीफ रिपोर्टर: 99990-48330,
राजेश वशिष्ठ उर्फ बिल्लू – ब्यूरो चीफ/प्रेसिडेंट सेफ ओर सिक्योर ग्रुप फरीदाबाद: 88606-11484