उधोग मंत्री विपुल गोयल पर अरावली वन क्षेत्र में ज़मीन ख़रीद फरोख्त का आरोप: ’पद्मश्री’ RTI कार्यकर्ता ने लगाये आरोप

0
86
सेफ ओर सिक्योर फरीदाबाद क्राइम न्यूज, दिनांक 03 सितंबर 2019
फरीदाबाद: अरावली वन क्षेत्र में नया मामला नेताओं के गले की फांस बनाता जा रहा है। दरअसल अरावली के प्रतिबंधित जमीन के खरीद फरोख्त का मामला सामने आया है। आरोप हरियाणा के उधोग मंत्री विपुल गोयल पर लगे हैं। इस जमीन पर अब फार्म हाउस और होटल बनाए जा रहे हैं। आरटीआई कार्यकर्ताओं ने इस मामले का खुलासा करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल [NGT] में केस दायर किया है। वही एनजीटी ने हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अधिकृत कर एक माह में रिपोर्ट कोर्ट में सबमिट करने का आदेश दिया है।

आरोप है कि जमीन की खरीद फरोख्त वर्ष 2014 से 2017 के बीच की गई। उक्त जमीन की रजिस्ट्रियां भी कराई जा चुकी हैं। ये जमीन अनंगपुर गांव की है। जो गैरमुमकिन पहाड़ है। बकायदा रजिस्ट्रियों में भी इसका जिक्र किया है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि इसी तरह अरावली बिकती रही तो एनसीआर का आॅक्सीजन कहे जाने वाली ये पर्वत श्रंखला खत्म हो जाएगी। आरटीआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि वह इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
बता दें भ्रष्टाचार विरोधी मंच ने प्रेसवार्ता का आयोजन किया था जिसमें सुप्रीम कोर्ट के वकील एवं पद्मश्री डॉ. बह्मदत्त एवं आरटीआई कार्यकर्ता वरुण श्योकंद ने इसका खुलासा किया।

“मेरे परिवार पर लगाए गए आरोप निराधार है। रेवन्यू रिकार्ड में जमीन हमारे नाम है। हम वहां गौशाला चलाते हैं। पिछली सरकार में कुछ लोगों ने चाहरदीवारी को तोड़कर कब्जा करना चाहते थे। हमने चारदिवारी करवाई है: विपुल गोयल, उधोग मंत्री हरियाणा सरकार”

वन क्षेत्र के रूप में चिन्हित है पूरी अरावली
आपको बता दें पूरी अरावली वन क्षेत्र घोषित है। वर्ष 1900 में पंजाब की तत्कालीन सरकार ने पंजाब भूमि परिरक्षण अधिनियम(पीएलपीए) लागू किया था। यह अधिनियम भूमिगत जल के संरक्षण और कटाव ग्रस्त क्षेत्रों या कटाव संभावी क्षेत्रों को संरक्षण प्रदान करता है। इस कानून का अधिकार क्षेत्र समय के साथ विकसित होता रहा। इसमें पहला बड़ा संशोधन 1926 में किया गया था, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि अधिनियम के प्रावधानों का उद्देश्य लोगों को स्वामित्व के अधिकारों से वंचित करना नहीं है। इस कानून की धारा 4 और 5 के तहत जारी आदेश और अधिसूचनाएं लगभग 11 हजार वर्ग किमी. क्षेत्र पर लागू होती हैं।
सरकार व संगठन के लोगों ने की है जमीन की खरीद फरोख्त
पत्रकारों से वार्ता करते हुए पद्मश्री डॉ. बह्मदत्त और वरुण श्योकंद ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद सरकार और संगठन में शामिल नेताओं ने अरावली वन क्षेत्र में गैर मुमकिन पहाड़ की जमीन की गैर कानूनी तरीके से खरीद फरोख्त की है। अधिकारियों से मिलीभगत कर रजिस्ट्रियां कराई गई है। साथ ही उन्होंने 14 रजिस्ट्रियां भी मीडिया के सामने रखी और बताया कि इसमें एक मंत्री की पत्नी और भतीजे भी खरीद फरोख्त में शामिल हैं। उन्होंने ये भी बताया की इसकी शिकायत पहले डीसी और निगम कमिश्नर से की गई थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुनवाई न होने पर आखिर में एनजीटी का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
एनजीटी में जिन लोगों को पार्टी बनाया गया है उसमें कमलजीत, कन्हैयालाल, प्रदीप बजाज, राकेश मोहन, नरेंद्र गुप्ता और एक बिल्डकान कंपनी को बनाया है।
किसी भी प्रकार की खबर सांझा करने के लिए संपर्क करे; — हनीश भाटिया – चीफ रिपोर्टर: 99990-48330,
राजेश वशिष्ठ उर्फ बिल्लू – ब्यूरो चीफ/प्रेसिडेंट सेफ ओर सिक्योर ग्रुप फरीदाबाद: 88606-11484